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​Vanakkam Poorvottar: TVK को अगर Tamilnadu में सरकार बनाने से रोका तो Vijay दोबारा चुनाव में जा सकते हैं! 

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कषगम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर होने के कारण राज्य में सियासी अनिश्चितता बनी हुई है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार गठन का दावा तभी स्वीकार किया जाएगा जब विजय अपने समर्थन में पर्याप्त विधायकों की सूची और बहुमत का प्रमाण प्रस्तुत करेंगे।हम आपको बता दें कि आज चेन्नई में विजय और राज्यपाल के बीच लगातार दूसरे दिन बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने विजय से पूछा कि उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या कैसे पूरी होगी और कौन कौन से विधायक उनके समर्थन में हैं। राज्यपाल ने यह भी संकेत दिया कि तमिलनाडु में स्थिर सरकार उनकी प्राथमिकता है और केवल दावा करने से सरकार नहीं बनाई जा सकती। हम आपको बता दें कि तमिलगा वेत्रि कषगम ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती हैं। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से यह संख्या 113 तक पहुंचती है। हालांकि विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट खाली करनी होगी। इसके बाद सदन की प्रभावी संख्या 233 रह जाएगी और बहुमत का आंकड़ा 117 होगा। ऐसे में विजय खेमे को सरकार बनाने के लिए पांच और विधायकों की आवश्यकता होगी।इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu में सियासी ‘खेला’, Puducherry Resort पहुंचे AIADMK के 28 विधायक, क्या है पूरा Game?वहीं, बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी द्रमुक से दूरी बनाते हुए विजय की पार्टी को समर्थन दे दिया है। कांग्रेस ने कहा कि उसका समर्थन धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है तथा वह किसी भी सांप्रदायिक ताकत को गठबंधन में शामिल नहीं देखना चाहती। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि राजनीति में गठबंधन बदलना विश्वासघात नहीं माना जा सकता।दूसरी ओर विजय ने भारतीय जनता पार्टी से समर्थन लेने में रुचि नहीं दिखाई है। राज्यपाल से मुलाकात के बाद उन्होंने अपने आवास पर वरिष्ठ नेताओं और कानूनी सलाहकारों के साथ बैठक की। पार्टी के भीतर यह राय भी उभरकर सामने आई कि यदि सरकार गठन में अड़चन आती है तो उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। कुछ नेताओं ने दोबारा चुनाव की संभावना पर भी चर्चा की। उनका तर्क है कि सहानुभूति विजय के साथ है और दोबारा चुनाव अगर अभी हो जाएं तो विजय स्पष्ट बहुमत से ज्यादा सीटें हासिल कर सकते हैं।इस बीच, तमिलनाडु की राजनीति में सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच संभावित समझौते की चर्चा है। चुनाव में एक दूसरे के कट्टर विरोधी रहे दोनों दल अब विजय को सत्ता से दूर रखने के लिए साथ आने की संभावना तलाश रहे हैं। द्रमुक के पास 59 और अन्नाद्रमुक के पास 47 विधायक हैं। दोनों की संयुक्त संख्या 106 होती है, इसलिए उन्हें भी छोटे दलों के समर्थन की आवश्यकता होगी। सूत्रों के अनुसार यदि विजय बहुमत साबित करने में असफल रहते हैं तो अन्नाद्रमुक नेता ई पलानीस्वामी के नेतृत्व में सरकार बनाने का प्रयास किया जा सकता है, जिसमें द्रमुक बाहर से समर्थन दे सकती है।इसी बीच अन्नाद्रमुक ने अपने कई विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसोर्ट में भेज दिया है। पार्टी प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की, हालांकि संख्या और कारण बताने से इंकार कर दिया। राजनीतिक जानकार इसे संभावित टूटफूट रोकने और आगे की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। उधर, विजय की पार्टी अब विदुथलाई चिरुथैगल कषगम, वाम दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों का समर्थन जुटाने में लगी हुई है। हालांकि इन दलों ने अभी खुलकर कोई निर्णय नहीं लिया है। विदुथलाई चिरुथैगल कषगम प्रमुख थोल तिरुमावलवन ने कहा कि पार्टी वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद फैसला करेगी।उधर, राजनीतिक तनाव के बीच तमिलनाडु कांग्रेस समिति ने शुक्रवार को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल और केंद्र सरकार संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं तथा सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने से रोका जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बहुमत की परीक्षा विधानसभा के पटल पर होनी चाहिए, न कि राजभवन में। उधर विजय समर्थकों के बीच भी बेचैनी बढ़ रही है। पार्टी को उम्मीद थी कि पहले शपथ ग्रहण होगा और बाद में विधानसभा में बहुमत साबित किया जाएगा, लेकिन राज्यपाल के रुख ने स्थिति बदल दी है। अब पूरा ध्यान संख्या जुटाने पर है। चेन्नई की राजनीतिक गलियों में फिलहाल यही चर्चा है कि क्या विजय बहुमत साबित कर पाएंगे या फिर तमिलनाडु में एक अप्रत्याशित राजनीतिक गठबंधन सत्ता संभालेगा। 

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