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​Kerala UDF: Congress के UDF के लिए ‘करो या मरो’ की जंग, क्या खत्म होगा 10 साल का सत्ता वनवास 

चुनाव आयोग की तरफ से केरल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी गई है। बता दें कि केरल में 09 अप्रैल 2026 को एक चरण में वोट डाले जाएंगे। वहीं 04 मई 2026 को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे। ऐसे में केरल के मुख्य राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ चुनावी रण में उतर चुके हैं। बता दें कि एक दशक से विपक्ष में रहने के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के लिए राज्य चुनाव ‘करो या मरो’ वाली स्थिति में है। वहीं इस चुनाव के रिजल्ट UDF के राज्य में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर काफी अहम माने जा रहे हैं।राज्य में UDF का इतिहासबता दें कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाला केरल राज्य का राजनीतिक दलों का गठबंधन है। यह केरल के दो प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों में से एक है। दूसरा गठबंधन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा है। इसे भी पढ़ें: Keralam में Priyanka Gandhi का LDF सरकार पर बड़ा हमला, बोलीं- युवा Jobs के लिए पलायन को मजबूरकेरल में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा का गठन साल 1979 में कांग्रेस नेसा के. करुणाकरन द्वारा किया गया था। यह कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन है, जोकि राज्य में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में काम करता है। यह गठबंधन पहली बार साल 1981 में सत्ता में आया था। वहीं साल 1982, 1991, 2001 और 2011 में केरल राज्य के विधानसभा चुनाव जीते हैं। साल 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में हार के बाद यूडीएफ वर्तमान समय में केरल में विपक्ष के रूप में काम कर रहा है। वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने राज्य की 20 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने सत्ता में वापसी के लिए अपनी रणनीति पर काम करना शुरूकर दिया है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी को केरल की जनता का समर्थन हासिल होता है। 

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