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​Jammu and Kashmir राज्यसभा चुनाव में ‘मैच फिक्सिंग’: सज्जाद लोन का BJP, NC और PDP पर सनसनीखेज आरोप 

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (PC) के अध्यक्ष और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद गनी लोन ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। लोन ने पिछले साल हुई चार राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) पर “मैच फिक्सिंग” और गुप्त समझौते का गंभीर आरोप लगाया है। राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ नेकां ने जहां तीन सीट पर जीत दर्ज की थी, वहीं विपक्षी दल भाजपा पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद एक सीट पर कब्जा जमाने में कामयाब रही थी। कम से कम चार गैर-भाजपा विधायकों ने भाजपा उम्मीदवार सत शर्मा के पक्ष में मतदान किया था, जिन्हें कुल 32 वोट हासिल हुए थे, जबकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पार्टी के सदस्यों की संख्या 28 है।
लोन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। उनके इस कदम से भी भाजपा प्रत्याशी को फायदा हुआ था।इसे भी पढ़ें: Aditya Dhar और Ranveer Singh की ‘हैट्रिक’ की तैयारी, Dhurandhar की सफलता के बाद एक और मेगा प्रोजेक्ट पर शुरू हुआ काम  पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख ने यहां एक बयान में कहा, “नेकां का एजेंट की नियुक्ति पर जोर न देना और पीडीपी का एजेंट नियुक्त न करना “मैच फिक्सिंग” की ओर इशारा करता है।”
लोन ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर एक आवेदन पर मिले जवाब का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें कहा गया था कि पीडीपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए किसी मुख्य एजेंट की नियुक्ति नहीं की थी।
हंदवारा से विधायक लोन ने कहा कि आरटीआई आवेदन पर मिले जवाब से पता चलता है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कम से कम तीन पार्टियों-भाजपा, नेकां और पीडीपी -ने मिलीभगत की थी।
उन्होंने कहा, “नेकां और पीडीपी के सक्रिय समर्थन के बिना भाजपा राज्यसभा सीट नहीं जीत सकती थी।”
इसे भी पढ़ें: Sonam Raghuvanshi Get Bail | पुलिस की एक ‘टाइपिंग एरर’ और हत्या की आरोपी सोनम को मिली राहत, मेघालय हनीमून मर्डर केस में बड़ा कानूनी मोड़ लोन ने 2015 के राज्यसभा चुनाव को याद करते हुए कहा कि पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं था, लेकिन तत्कालीन सत्तारूढ़ गठबंधन ने उनकी पार्टी से अपनी पसंद के एक एजेंट को नियुक्त करने के लिए कहा था।
उन्होंने कहा, “मुझे याद है जब मैंने 2015 के राज्यसभा चुनाव में वोट डाला था। हमारी पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं था, लेकिन सत्ताधारी गठबंधन (पीडीपी-भाजपा) ने हमसे अपनी पसंद का एक एजेंट नियुक्त करने का अनुरोध किया था।”
लोन ने कहा कि एजेंट के रूप में नियुक्त किया गया व्यक्ति विधायक नहीं था और उसने विधायकों के वोटों का सत्यापन किया था। 

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