नासिक के कथित ज्योतिषी अशोक खरात से जुड़ा दुष्कर्म मामला अब देशभर में चर्चा का केंद्र बन चुका है। इस पूरे प्रकरण में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे न केवल अपराध की गंभीरता बढ़ी है बल्कि इसके सियासी और सामाजिक आयाम भी सामने आ रहे हैं।हम आपको बता दें कि स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रविवार को अशोक खरात की पुलिस हिरासत 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है। जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और जब्त किए गए मोबाइल फोन की क्लोन कॉपी का विश्लेषण किया जाना बाकी है। इसके लिए डिजिटल विशेषज्ञों की जरूरत है और यह प्रक्रिया आरोपी की मौजूदगी में ही पूरी की जाएगी। बताया जा रहा है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी ने राज्य फोरेंसिक प्रयोगशाला से मोबाइल डेटा की क्लोन कॉपी प्राप्त कर ली है। अब तक आरोपी के खिलाफ 10 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से 8 मामले दुष्कर्म से जुड़े हैं।इसे भी पढ़ें: Nashik का ढोंगी बाबा Ashok Kharat EXPOSED: ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर खेलता था घिनौना खेल! महिलाओं की आपबीती सुनकर हैरान रह जाएंगेइस बीच, सहायक सरकारी वकील शैलेंद्र बागाडे ने अदालत में बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आरोपी ने कई अहम संपर्कों के नंबर फर्जी नामों से सेव कर रखे हैं, जिससे जांच में बाधा आ रही है। जांच एजेंसियां आरोपी की चल और अचल संपत्तियों की भी जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं उसने संपत्ति अपने नाम के अलावा अन्य लोगों के नाम पर तो नहीं बनाई।बताया जा रहा है कि जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर उनका शोषण करता था। एक पीड़िता ने बताया कि उसे पीने के लिए खारा और कड़वा पानी दिया गया, जिसके बाद उसे चक्कर आने लगे और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही है कि उस पानी में क्या मिलाया गया था और इसका स्रोत क्या था। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि आरोपी महिलाओं को मिठाई या पेय पदार्थ में नशीला तत्व मिलाकर उन्हें बेहोश या सम्मोहित करता था।यह भी बताया जा रहा है कि आरोपी महिलाओं को अंधविश्वास और तथाकथित धार्मिक प्रक्रियाओं के नाम पर अपने जाल में फंसाता था। इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न खबरों और जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वह महिलाओं को यह विश्वास दिलाता था कि उनकी समस्याओं का कारण शारीरिक और आध्यात्मिक अशुद्धि है, जिसे दूर करने के लिए विशेष प्रक्रिया करनी होगी। इसी बहाने वह कथित रूप से योनि शुद्धिकरण जैसी भ्रामक और आपत्तिजनक प्रक्रिया का हवाला देता था। पीड़िताओं को विश्वास में लेकर वह इस प्रक्रिया को जरूरी बताता और फिर उसी के नाम पर उनके साथ दुष्कर्म करता था। कई मामलों में महिलाओं को पहले नशीला पदार्थ दिया जाता था, जिससे वह विरोध करने की स्थिति में नहीं रहती थीं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे तरीके यानी उसके काम करने के पैटर्न की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह समझा जा सके कि उसने किस तरह लंबे समय तक महिलाओं को धोखे में रखकर इस अपराध को अंजाम दिया।यह भी बताया जा रहा है कि जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी ने 150 से अधिक महिलाओं का शोषण किया हो सकता है। पुलिस ने आरोपी के कार्यालय से लैपटॉप और मोबाइल जब्त किए हैं, जिनसे कई अहम जानकारियां मिली हैं। उसके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है और संपत्तियों को सील कर दिया गया है।साथ ही इस मामले में एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है। आरोपी से जुड़े कथित अश्लील वीडियो और फोटो इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं। कुछ प्लेटफार्म पर इन वीडियो को बेचने तक की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सोशल मीडिया मंचों पर इन वीडियो के पैकेज सैकड़ों रुपये में बेचे जा रहे हैं। हालांकि जांच में यह भी सामने आया है कि कई वीडियो कृत्रिम तकनीक से बनाए गए हो सकते हैं। पुलिस ने ऐसे वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।उधर, यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि आरोपी के संबंध प्रभावशाली लोगों से थे, जिससे वह लंबे समय तक बचता रहा। इस मामले में एनसीपी नेता रूपाली चाकणकर का नाम भी सामने आया है, जो एक ट्रस्ट से जुड़ी बताई जा रही हैं। हालांकि एसआईटी ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार किया है। वहीं कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया है कि कई अधिकारी और प्रभावशाली लोग आरोपी के संपर्क में थे। दूसरी ओर कुछ नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है।देखा जाये तो यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी इतने लंबे समय तक बचा कैसे रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषियों को सजा।बहरहाल, अशोक खरात मामला देश में महिला सुरक्षा, डिजिटल अपराध और राजनीतिक संरक्षण जैसे मुद्दों को एक साथ सामने लाता है। जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए खुलासे इस केस को और जटिल बना रहे हैं। अब सभी की नजरें एसआईटी की जांच और अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।