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​’भारत किसी भी दुस्साहस का जवाब देने को तैयार’, नामित नौसेना प्रमुख स्वामीनाथन का कड़ा संदेश 

भारत के नामित नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने सोमवार को राष्ट्र की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा को लेकर एक अत्यंत स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत किसी भी सीमा पार दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ स्वामीनाथन ने कहा कि भारत कई वर्षों से आतंकवाद का शिकार रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में आतंकी गतिविधियां किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकतीं, खासकर तब जब ये विदेशी धरती से संचालित हों।इसे भी पढ़ें: Britain की पहली Sikh Rugby Player का नया दांव, अब Sumo रिंग में इतिहास रचने को तैयार 
उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ विशेष रूप से उन आतंकियों और आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर चलाया गया, जो 2025 में पहलगाम में हुई अत्यंत जघन्य घटना में शामिल थे।
स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘बेहतर समझ रखने वाले लोग अच्छे से जानते हैं दुस्साहस कभी भारत की तरफ से नहीं होता। भारत हमेशा से जवाब देने की स्थिति में रहा है। दुस्साहस सीमा पार से होता है। लोग जो चाहें कहें, लेकिन जहां तक हमारा सवाल है — भारत तैयार रहेगा और अगर उस तरफ से कोई दुस्साहस हुआ तो हम उसे कुचलने में सक्षम हैं।’’
स्वामीनाथन पाकिस्तान के फील्ड मार्शल एवं सेना अध्यक्ष आसिम मुनीर की उस टिप्पणी के जवाब में बोल रहे थे, जिसमें कहा गया था कि इस्लामाबाद के खिलाफ किसी भीदुस्साहस के अत्यंत व्यापक, खतरनाक और दूरगामी परिणाम होंगे।
स्वामीनाथन ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस लिए भी जरूरी है कि ताकि भारत आतंकवाद का शिकार बनता न रहे। यह इस बात की भी याद दिलाता है कि देश को और मजबूत बनाने के लिए क्या करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना के दृष्टिकोण से ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है।इसे भी पढ़ें: Global Tension के बीच SBI का दावा, पटरी से नहीं उतरेगी Indian Economy की रफ़्तार 
स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘वैश्विक सुरक्षा परिवेश में गहरा बदलाव आ रहा है। आपूर्ति श्रृंखलाओं को तेजी से हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, महत्वपूर्ण तकनीकों तक पहुंच को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हर क्षेत्र की रणनीतिक तस्वीर बदल रही है। जो देश रक्षा तैयारी के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर बहुत अधिक निर्भर हैं, वे न केवल आर्थिक कमजोरी बल्कि रणनीतिक अनिश्चितता के भी शिकार होते हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना शांतिकाल की कोई औपचारिक सेना नहीं, बल्कि एक सक्रिय नौसेना है जो विशाल और जटिल समुद्री क्षेत्र में लगातार तैनात रहती है।
उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि अपने दायित्व को पूरा करने के लिए नौसेना को ऐसी प्रणालियों और मंच से लैस होना होगा जो भारत में ही डिजाइन, विकसित और निर्मित हों।
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नौ मई को भारत का अगला नौसेना प्रमुख नियुक्त किया गया। वह एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लेंगे, जो 31 मई को सेवानिवृत्त होंगे।PTI News Read Latest
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