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​केजरीवाल के ‘हनुमान’ ने ही लंका जलाई, सिसोदिया-केजरीवाल की इमरजेंसी मीटिंग, क्या बिखर जाएगी ‘झाड़ू’? 

आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए मौजूदा समय किसी ‘राजनीतिक भूकंप’ से कम नहीं है। गुजरात दौरे से लौटते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया सीधे दिल्ली के मुख्यमंत्री और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुँचे। देर रात हुई इस आधे घंटे की बैठक का मुख्य एजेंडा राज्यसभा के सात कद्दावर सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ना और आगामी पंजाब चुनाव से पहले उपजे संकट का समाधान निकालना था। दोनों नेताओं ने पार्टी की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की और इस बात पर विचार किया कि अगले साल पंजाब में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से पहले इस संकट से कैसे निपटा जाए।न्यूज़ एजेंसी ANI ने AAP सूत्रों के हवाले से बताया, “देर रात दिल्ली लौटने के बाद, सिसौदिया सीधे हवाई अड्डे से पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के आवास पर गए। दोनों नेताओं के बीच आधे घंटे से ज़्यादा समय तक मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात के दौरान, उन्होंने पार्टी में हुई फूट के संभावित असर और भविष्य की रणनीति क्या होनी चाहिए, इस पर भी चर्चा की।” इसे भी पढ़ें: Jio का Gamers और Youth के लिए धांसू प्लान, FanCode, Snapchat+ के साथ पाएं Unlimited 5G DataAAP के सात राज्यसभा सांसदों – राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल – ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। AAP ने इसे “पंजाब के साथ विश्वासघात” करार दिया है और BJP पर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके पार्टी में फूट डालने का आरोप लगाया है।पार्टी अब इन सातों नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। इसके तहत, पार्टी ND गुप्ता के ज़रिए राज्यसभा के सभापति CP राधाकृष्णन को एक पत्र भेजने पर विचार कर रही है, जिसमें दलबदल विरोधी क़ानून के तहत चड्ढा, मित्तल और पाठक के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की जाएगी। गुप्ता उच्च सदन (राज्यसभा) में AAP के मुख्य सचेतक (Chief Whip) हैं।AAP सूत्रों ने ANI को बताया, “गुप्ता के पत्र में दलबदल विरोधी क़ानून के तहत कार्रवाई की मांग की जाएगी। इन तीन नेताओं को सार्वजनिक रूप से BJP में शामिल होते हुए देखा गया था। बाकी चार नेताओं को सार्वजनिक तौर पर ऐसा करते हुए नहीं देखा गया। इसलिए, मुख्य सचेतक BJP कार्यालय में देखे गए इन तीन सांसदों के ख़िलाफ़ ही शिकायत दर्ज कराएंगे।” इसे भी पढ़ें: Russia ने बेचा 22000 किलोग्राम का बंपर सोना, क्या करेगा भारतइस घटनाक्रम से उच्च सदन में BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मज़बूती मिलेगी, क्योंकि इसके चलते राज्यसभा में AAP की सीटों की संख्या 10 से घटकर महज़ तीन रह गई है। यह समय भी बेहद अहम है, क्योंकि AAP इस समय अगले साल पंजाब, गोवा और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है और दिल्ली से बाहर भी अपने जनाधार का विस्तार करने की उम्मीद कर रही है। सभी नेताओं, विशेष रूप से चड्ढा और पाठक ने, पंजाब में AAP का आधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी; लेकिन उनके जाने से केजरीवाल की पार्टी में एक बड़ा खालीपन पैदा होने की संभावना है। अब यह स्थिति ही शायद यह तय करेगी कि क्या AAP अपने विस्तार के लक्ष्यों को बनाए रख पाएगी, या फिर उसे अपने मौजूदा मज़बूत गढ़ों तक ही सिमटकर रहना पड़ेगा। 

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