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​George Soros पर घिरी BJP? Pawan Khera ने Kiren Rijiju से पूछा – किस मंत्री ने की मुलाकात? 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बुधवार को केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू को चुनौती दी कि वे सार्वजनिक रूप से यह घोषित करें कि भाजपा के किसी भी मंत्री ने जॉर्ज सोरोस से मुलाकात नहीं की है, और न ही किसी नेता के बच्चे सोरोस द्वारा वित्तपोषित संगठनों में काम करते रहे हैं या कर चुके हैं। उन्होंने पार्टी पर अपने सदस्यों को सोरोस से जोड़ने वाले आरोपों को लेकर सवाल उठाए। एएनआई से बात करते हुए खेड़ा ने कहा कि किरेन रिजिजू से कहिए, और मैं उन्हें चुनौती देता हूं, कि वे सार्वजनिक रूप से यह कहें कि भाजपा के किसी भी मंत्री ने सोरोस से मुलाकात नहीं की है। दूसरा, भाजपा नेताओं के बच्चों का एक भी उदाहरण ऐसा नहीं है जो सोरोस द्वारा वित्तपोषित संगठनों में काम कर रहा हो या कर चुका हो। मैं उन्हें चुनौती देता हूं। इसे भी पढ़ें: Assam Congress में घमासान: Bhupen Borah का ‘अपमान’ वाला इस्तीफा, Gaurav Gogoi बोले- ये BJP में जाने के बहाने हैंये टिप्पणियां तब आईं जब रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की हालिया राजनीतिक विवादों के बाद उनके व्यवहार को बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए उनकी आलोचना की। एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में केंद्रीय संसदीय कार्य समिति के नेता ने कहा कि उनका व्यवहार बचकाना और उनकी स्थिति के हिसाब से गैरजिम्मेदाराना है। विपक्ष का नेता पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। सदन से बाहर जाना, लोगों को देशद्रोही कहना, दिखावटी धरने देना और अप्रकाशित पुस्तक पढ़ने पर जोर देना, यह सब बचकाना व्यवहार है। हमने भारत के इतिहास में ऐसा विपक्ष का नेता कभी नहीं देखा।रिजिजू ने आगे कहा कि राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं। क्योंकि वे भारत विरोधी ताकतों से जुड़े हुए हैं। वे देश-विदेश में नक्सलवादियों, चरमपंथियों, विचारधारावादियों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मिलते हैं। मंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर संसद की परंपराओं का पालन न करने और कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया। इसे भी पढ़ें: Amit Shah’s West Bengal Visit | अमित शाह का बंगाल दौरा! मायापुर ISKCON मुख्यालय में आध्यात्मिक कार्यक्रम में होंगे शामिलउन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में शोर-शराबा और हंगामा तो हमेशा होता ही है: हर पार्टी का अपना एजेंडा होता है और वह उसे सदन में आगे बढ़ाने की कोशिश करती है। यह अपने आप में कोई विफलता नहीं है। लेकिन हंगामे के साथ-साथ हमें उठाए जा रहे कदमों पर भी गौर करना होगा। विपक्ष में रहते हुए हमने स्पीकर पर कागज नहीं फेंके, सत्ता पक्ष के खिलाफ बैनर नहीं उठाए, और यही वजह है कि मैं नाराज हूं। 

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