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​General MM Naravane Memoir Row | दिल्ली पुलिस ने पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से की पूछताछ, साजिश के पहलू की जांच शुरू 

 पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के बहुप्रतीक्षित और वर्तमान में अप्रकाशित संस्मरण (Memoirs) के कथित तौर पर लीक होने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस संबंध में विश्व प्रसिद्ध पब्लिशिंग हाउस पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या पुस्तक के संवेदनशील अंशों को सार्वजनिक करने के लिए रक्षा मंत्रालय (MoD) से अनिवार्य मंजूरी को जानबूझकर दरकिनार किया गया था।दिल्ली पुलिस ने पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से की पूछताछ सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने इससे पहले लगभग 15 सवालों के जवाब मांगने के लिए प्रकाशक को नोटिस जारी किया था और बुधवार को गुरुग्राम स्थित संबंधित कार्यालय का दौरा भी किया था।
सूत्रों के अनुसार, बृहस्पतिवार को कंपनी प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उन्होंने कुछ सवालों के जवाब दिए और अन्य सवालों के जवाब देने के लिए समय मांगा।इसे भी पढ़ें: India-US Trade Deal | केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को नकारा, कहा– ‘किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित’
पुलिस ने कहा कि जवाबों का विश्लेषण किया जा रहा है और प्रबंधन तथा प्रकाशन प्रतिनिधियों से आगे की पूछताछ किए जाने की संभावना है।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान में कहा था कि पुस्तक का प्रकाशन नहीं हुआ है और कंपनी द्वारा इसकी कोई भी प्रति, चाहे यह मुद्रित हो या डिजिटल, जारी, वितरित या बेची नहीं गई है।पेंगुइन इंडिया का स्पष्टीकरणविवादों के बीच, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपना रुख साफ किया है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान में कहा: पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। कंपनी द्वारा इसकी कोई भी प्रति (चाहे वह मुद्रित हो या डिजिटल) किसी भी माध्यम से जारी, वितरित या बेची नहीं गई है।इसे भी पढ़ें: India-US Trade Deal मार्च तक संभव, घटेंगे Tariff, भारतीय निर्यातकों को मिलेगी बड़ी राहत हम?जनरल एम एम नरवणे का कार्यकाल भारतीय सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, जिसमें पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध जैसी प्रमुख घटनाएं शामिल हैं। उनके संस्मरणों में इन घटनाओं के विवरण होने की संभावना है, जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। यदि किताब के अंश बिना अनुमति के सार्वजनिक होते हैं, तो इसे आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है।  

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